भारत में सट्टेबाजीः क्रिकेट से लेकर घुड़सवारी तक, अब लगा सकते हैं आप लीगल तरीके से सट्टा

कमीशन ने सिफारिश की है कि जब सट्टेबाजी पर रोक लगाई नहीं जा पा रही है तो इसे लीगल ही कर देना चाहिये। कमीशन ने सट्टेबाजी को लीगल करने के साथ साथ इसके लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं।

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जयपुर। भारत में सट्टेबाजी बैन है। ये सिर्फ कहने की ही बातें हैं। क्रिकेट जैसा खेल जो कि भारतीयों के रगों में बसता है, में सट्टा का लगना और उसमें हार जीत का होना, ये शायद सिर्फ सट्टा को बैन करने वालों को ही नहीं पता है। मतलब साफ है कि साल 2013 में आईपीएल सट्टेबाजी में फंसे बिंदू दारा सिंह हों या फिर हाल ही में आया अरबाज़ खान का नाम हो।

बड़े से लेकर छोटे, अमीर से लेकर कम अमीर और यहां तक कि कम उम्र के किशोर भी किसी भी खेल के लिए सट्टेबाजी करते हुए आराम से पाए जाते हैं।

ऐसे में अब भारत में सट्टेबाज़ी हो सकती है लीगल। आम आदमी ही नहीं, इससे फायदा सरकार को भी होगा। सट्टेबाज़ी के लीगल हो जाने के बाद किसी भी तरह की किसी भी इंसान पर सट्टेबाज़ी को लेकर नज़र भी तो नहीं रखनी पड़ेगी।

कानून मंत्रालय को 5 जुलाई को लॉ कमीशन ने 176वीं रिपोर्ट ‘लीगल फ्रेमवर्क: गैंबलिंग एंड स्पोर्ट्स बेटिंग इंक्लूडिंग क्रिकेट इन इंडिया’ रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कमीशन ने ये कहा है कि सट्टेबाजी पर रोक लगाने का कोई असर नहीं दिख रहा है और सट्टेबाजी का कारोबार आराम से देश में देखा जा सकता है।

कमीशन ने सिफारिश की है कि जब सट्टेबाजी पर रोक लगाई नहीं जा पा रही है तो इसे लीगल ही कर देना चाहिये। कमीशन ने सट्टेबाजी को लीगल करने के साथ साथ इसके लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं।

कमीशन ने सुझाव दिया है कि सट्टेबाजी के लिए आधार कार्ड चया पैन कार्ड को अनिवार्य कर देना चाहिये और साथ साथ इसके लिए डिजीटल पेमेंट से लेन देन को ज़रुरी कर देना चाहिये। इससे किसी भी तरह के घपले की आशंका भी नहीं बचेगी। कमीशन के मुताबिक इससे सरकार को भी फायदा होगा।

कमीशन ने सिफारिश की है कि सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि हॉकी, फुटबाल और घुड़सवारी सहित सारे खेलों पर सट्टेबाजी को लीगल कर देना चाहिये क्योंकि कानून के नियमों के मुताबिक सट्टेबाजी पर रोक लगाई नहीं जा सकी है।

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