बेंगलुरू टेस्ट : बारिश के कारण खेल रुका

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अफगानिस्तान और भारतीय क्रिकेट टीम के बीच एम.चिन्नास्वामी स्टेडियम में जारी एकमात्र टेस्ट मैच के पहले दिन गुरुवार को दूसरे सत्र का खेल बारिश के कारण रोक दिया गया है। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने खेल रोके जाने तक एक विकेट के नुकसान पर 248 रन बना लिए थे। सलामी बल्लेबाज मुरली विजय (94) और लोकेश राहुल (33) रनों पर नाबाद हैं।

भारतीय टीम ने पहले सत्र की समाप्ति तक सलामी बल्लेबाज शिखर धवन (107) की शतकीय पारी के दम पर 158 रन बना लिए थे। धवन भारतीय टीम के लिए पहली पारी के पहले सत्र में शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज हैं।

इसके बाद, दूसरे सत्र में टीम के खाते में 10 रन और जुड़े थे कि यामिम अहमदजाई ने मोहम्मद नबी के हाथों धवन को कैच आउट करा भारतीय टीम का पहला विकेट गिराया। धवन ने अपनी पारी में 96 गेंदों का सामना कर 19 चौके और तीन छक्के लगाए।

धवन के आउट होने के बाद विजय ने राहुल के साथ मिलकर नाबाद रहते हुए 80 रन जोड़कर टीम का स्कोर 248 तक पहुंचा दिया।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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