Bengal : राजनीतिक दल फिल्मी हस्तियों के सहारे अपनी नैया पार लगाने की होड़ में

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पश्चिम बंगाल में चुनावी तापमान बढ़ने के साथ ही राजनीतिक दलों ने स्थानीय सिने सितारों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। राजनीतिक दल स्थानीय फिल्मी सितारों को मुख्यधारा की चुनावी राजनीति में शामिल होने के लिए एक वैकल्पिक कैरियर की पेशकश कर रहे हैं। बंगाल टॉलीवुड हस्तियों का एक समूह हाल ही में राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों खेमों में शामिल हुआ है।

पिछले हफ्ते अभिनेत्री सयानी घोष, कंचन मल्लिक, निर्देशक राज चक्रवर्ती और कोलकाता के फिल्म और टेलीविजन बिरादरी के कई अन्य सदस्य सत्तारूढ़ दल में शामिल हुए थे। इसके अलावा अभिनेत्री सयांतिका बंद्योपाध्याय भी बुधवार को राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की उपस्थिति में तृणमूल में शामिल हुई हैं।

दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को मशहूर हस्तियों के लिए एक अनूठी कार्यशाला का आयोजन किया, जहां पार्टी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने सभी नव-प्रवर्तित टॉलीवुड हस्तियों को प्रशिक्षण दिया कि वे कैसे प्रचार कर सकते हैं और किस प्रकार से आम मतदाताओं का दिल जीत सकते हैं।

डेढ़ घंटे तक चली इस कार्यशाला में चक्रवर्ती, सुदेशना रॉय, मनाली दे, सौरव दास, रानीता दास, श्रीतमा भट्टाचार्य और कई अन्य लोग शामिल रहे।

सूत्रों के मुताबिक, मशहूर हस्तियों से कहा गया है कि वे व्यक्तिगत हमलों से परहेज करें और पिछले 10 वर्षो में बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की विकास योजनाओं के बारे में बात करें।

उन्हें एक पुस्तक भी दी गई है, जिसमें राज्य सरकार की सभी योजनाओं और लाभों का विवरण है। मशहूर हस्तियों को निर्देश दिया गया कि वे किताब का अच्छी तरह से अध्ययन करें और मतदाताओं के साथ मिलकर पार्टी के लिए समर्थन हासिल करें।

चक्रवर्ती ने कहा, “हमें राज्य सरकार के प्रदर्शन के बारे में जानकारी के साथ लोगों तक पहुंच स्थापित करने के लिए कहा गया है। उन्होंने हमें राज्य सरकार की उन सभी योजनाओं का विवरण दिया है, जो अब तक पेश की गई हैं। अब हमें जितना संभव हो, इन्हें लोगों के साथ साझा करने की जरूरत है।”

पिछले महीने बांग्ला फिल्म उद्योग की अन्य विख्यात हस्तियों में शामिल अभिनेता यश दासगुप्ता, सौमिली घोष विश्वास, पापिया अधिकारी, मीनाक्षी घोष, सुतापा मुखर्जी, त्रामिला भट्टाचार्य और मल्लिका बनर्जी के साथ ही निर्देशक राज मुखर्जी, निर्माता-निर्देशक अतनु रॉय और संगीत निर्देशक सुभायु बेदोगो ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा है। हाई-वोल्टेज पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत हासिल करने के लिए तृणमूल के साथ ही भगवा पार्टी भी पूरा जोर लगा रही है और इस दिशा में आगे बढ़ते हुए अब फिल्मी जगत के सितारे राजनीतिक दलों में शामिल हो रहे हैं।

अभिनेता हिरेन चटर्जी, जिन्हें तृणमूल के अंदरूनी सूत्र के रूप में जाना जाता है, वह भी भाजपा में शामिल हो गए हैं और पिछले महीने मालदा और दक्षिण दिनाजपुर जिलों में पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष के साथ प्रचार करते देखे गए हैं।

अगर दक्षिणपंथी ताकतें भी बंगाल जैसे राज्य में स्थानीय सेलिब्रिटी को अपने पाले में लेकर आ रही हैं तो फिर यहां लंबे समय तक शासन करने वाले वाम दल कैसे पीछे रह सकते हैं?

28 फरवरी को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक मेगा शो में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्‍सवादी (माकपा) ने अभिनेता सब्यसाची चक्रवर्ती, बडगा मोइत्रा, निर्देशक अनीक दत्ता और कमलेश्वर मुखर्जी जैसी कई हस्तियों को देखा गया था, जो वाम-कांग्रेस-भारतीय सेक्युलर मोर्चा (आईएसएफ) गठबंधन के लिए खुले तौर पर प्रचार कर रहे हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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