पटियाला में Belarusian athletics कोच का निधन

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खेल मंत्रालय द्वारा सितंबर तक मध्यम और लंबी दूरी के कोच के रूप में नियुक्त किए गए बेलारूसी निकोलाई शेन्सारेव का शुक्रवार को पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) में उनके कमरे में निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) के अध्यक्ष आदिल जे, सुमरीवाला ने निकोलाई के निधन की पुष्टि की।

सुमरीवाल ने एक बयान में कहा, पटियाला में हाल ही में नियुक्त मध्यम दूरी के कोच डॉ. निकोलाई शेन्सारेव के अचानक निधन के बारे में जानने के बाद एएफआई को गहरा धक्का लगा है।

सुमीरवाला ने कहा कि जल्द ही एक विस्तृत बयान जारी किया जाएगा।

नई दिल्ली में भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक संदीप प्रधान ने एक बयान में कहा, यह डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार एक स्वाभाविक मौत है। पुलिस को सूचित कर दिया गया है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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