‘तख्त’ का हिस्सा बनना मेरे लिए बड़ी बात : अभिनेत्री जाह्न्वी कपूर

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हिंदी फिल्म ‘धड़क’ की सफलता के साथ करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री जाह्न्वी कपूर का कहना है कि मल्टीस्टारर ऐतिहासिक फिल्म ‘तख्त’ का हिस्सा बनना उनके लिए बड़ी बात है क्योंकि अभी भी न्यूकमर है। जाह्न्वी ने ‘धड़क’ फिल्म की सक्सेस पार्टी में गुरुवार को यह बात कही। उनके साथ फिल्म निर्देशक शशांक खेतान, निर्माता करण जौहर, सह-कलाकार ईशान खट्टर और बहन खुशी कपूर भी मौजूद थी।

आगामी ऐतिहासिक फिल्म ‘तख्त’ का हिस्सा बनने के बारे में पूछे जाने पर जाह्न्वी ने कहा, “मैं क्या कह सकती हूं? मैं अब भी सदमे में हूं। यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है और आभारी हूं और भाग्यशाली महसूस कर रही हूं कि करण (जौहर) ने मुझे इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए चुना।” उन्होंने कहा, “मैं बहुत उत्साहित हूं और अच्छे काम की उम्मीद करती हूं।” फिल्म 2020 में रिलीज होगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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