धार्मिक मान्यताओं के पीछे कई तरह के है फायदे, जानकर रह जायेंगे हैरान

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जयपुर। भारत जैसे देश में कई तरह की करोड़ों धार्मिक मान्यताएं कई सालों से चली आ रही है जिनका हम पालन कर रहें हैं लेकिन कई लोगों ने इन धार्मिक मान्यताओं अंधविश्वास का दर्जा भी दे दिया है। लेकिन विज्ञान कहते है कि सारी धार्मिक मान्यताएं केवल अंधविश्वास नहीं है। ये धार्मिक मान्यताएं है जैसे कई बार पर बायीं आँख फड़कने को अशुभ माना जाता है इसी तरह से अंतिम संस्कार से वापिस घर आने पर नहाने की रस्म है। तो ये कोई अंधविश्वास नहीं है इसके पीछे कई विज्ञान के कारण छिपे हुये हैं। आज हम आपको बताते है इन मान्याताओं के पीछे वो कौनसे वैज्ञानिक कारण क्या है।

ज्यादा शिक्षित होने के बाद लोगों ने इन धार्मिक मान्यताओं को अन्धविश्वास का नाम दे दिया हैं।  वैज्ञानिक यह है कि अक्सर जब किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है तो उसमें भाग लेने वाला व्यक्ति वापस घर आकर नहाता है। इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क की बात करें तो ये है कि जब किसी की मौत होती है तो उसका शरीर अपघटित होना शुरू कर देता है। जब हम किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं तो उसका शरीर उस समय हवा में जीवाणु छोड़ने लगता है, इसलिए हमें वापस आकर नहाना पड़ता है। आपने कई बार देखा होगा कि अक्सर लोग बुरी नज़र से बचने के लिए अपनी दुकान या घर के दरवाजे पर नींबू मिर्ची टांगते हैं। कहते है कि इससे बुरी नज़र का साया नहीं पड़ता है साथ ही नकारात्मक ऊर्जा भी पास नहीं आती है।

लेकिन विज्ञान कहता है कि नींबू और मिर्ची में विटामिन सी जैसे कई उपयोगी अम्ल पाए जाते हैं। ये प्राकृतिक कीटनाशक का काम करते हैं। इसी तरह से हर भारतीय शादीशुदा महिला अपने पैरों में बिछिया पहनती हैं। विज्ञान इसके लिए कहता है कि पैर की दूसरी उंगली में चांदी की बिछिया पहने से तंत्रिका तंत्र सही काम करता है। विज्ञआन बताता है कि बिछिया जिस उंगली पर दबाव डालता है उस नस का सीधा संबंध यूटेरस से होता है। तभी तो बिछिया पहनने से यूटेरस तक रक्त परिसंचरण ठीक होता है। तो ये हैं धार्मिक मान्यताएं के पीछे के राज़ जिससे आप अनजान थे।

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