बायर्न साने को खरीदने का प्रयास करेगी : क्लब चेयरमैन

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जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख के चेयरमैन कार्ल-हिंज रूमिनिजे ने कहा कि वह इस समर ट्रांसफर विंडो में फारवर्ड खिलाड़ी लेरॉय साने को खरीदने का प्रयास करेंगे।

साने ने बीते सीजन इंग्लिश क्लब मैनचेस्टर सिटी के साथ ट्रेबल जीता। उन्होंने 47 मैचों में 16 गोल दागे।

बीबीसी ने रूमिनिजे के हवाले से बताया, “हम कोशिश करेंगे। मैं यह वादा नहीं कर सकता कि यह सफल होगा या नहीं।”

सिटी ने 2016 में साने को शाल्के से 3.7 करोड़ पाउंड में खरीदा था और वह मौजूदा चैम्पियन के लिए बेहतरीन खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। जर्मन खिलाड़ी को सिटी के साथ अभी दो साल का करार बाकी है।

रूमिनिजे ने कहा, “जब वह शाल्के में थे तब भी हमें उन्हें अपनी टीम में शामिल करने का विचार आया था, लेकिन उस समय हम उन्हें टीम में निरंतर स्थान देने का वादा नहीं कर पाए। तीन साल पहले रॉबिन और रिबरी टॉप पर थे।”

बायर्न म्यूनिख के स्टार खिलाड़ी रॉबिन और रिबरी ने पहले ही 2018-19 सीजन के बाद क्लब छोड़ने की घोषणा कर दी थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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