बल्लेबाज शरजील खान ने कहा, अतीत में नहीं जाना चाहता

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स्पॉट फिक्सिंग के कारण तीन साल का बैन झेलने के बाद वापसी कर रहे पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज शरजील खान ने कहा है कि वह अतीत में नहीं जाना चाहते और आगे की तरफ ध्यान देते हुए पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में अच्छा प्रदर्शन करना चाहते हैं।

शरजील 20 फरवरी से शुरू हो रहे पीएसएल के पांचवें संस्करण में कराची किंग्स की तरफ से खेलेंगे।

उन्होंने कहा, “हर किसी का अतीत होता है और भविष्य भी। मैं अतीत में नहीं जाना चाहता। जो हुआ वो हो चुका और वो चैप्टर अब खत्म हो चुका है। मेरा ध्यान अब सिर्फ पीएसएल में अच्छा करने पर है। मैं राष्ट्रीय टीम में चयन के बारे में भी नहीं सोच रहा हूं।”

शरजील को पीएसएल-2017 में स्पॉट फिक्सिंग के कारण तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। उन पर मैच में तय समय पर जानबूझकर दो गेंदों पर रन न बनाने के आरोप थे।

उन्होंने कहा, “मैं पीएसएल खेलते हुए बैन हुआ था और पीएसएल में वापसी कर रहा हूं, इसलिए मेरे लिए इस टूर्नामेंट में अच्छा करना बहेद जरूरी है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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