‘बत्ती गुल मीटर चालू’ मुख्यधारा की फिल्म है : अभिनेता शाहिद कपूर

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अभिनेता शाहिद कपूर का कहना है कि उनकी आगामी फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ मुख्यधारा की फिल्म है, जिमें हास्य के साथ-साथ मुद्दा भी है। शाहिद ने शुक्रवार को फिल्म की अपनी सह-कलाकार श्रद्धा कपूर और दिव्येंदू शर्मा, निर्देशक श्री नारायण सिंह और निर्माता भूषण कुमार के साथ ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ के ट्रेलर लॉन्च पर संवाददाताओं से बातचीत की।

यह पूछे जाने पर कि क्या व्यावसायिक फिल्मों की रिलीज के साथ इस तरह की मुद्दे पर आधारित फिल्म करने का उनका फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया? इस पर शाहिद ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह फिल्म मुख्यधारा की फिल्म नहीं है। मुझे लगता है कि यह मुख्यधारा की फिल्म है। मुझे लगता है कि मुद्दे एक फिल्म को गैर-मुख्यधारा की फिल्म नहीं बनाते।”

शाहिद ने निर्देशक की प्रशंसा करते हुए कहा,”वह व्यावसायिक फिल्मों की तरह अपनी कहानी को पेश करते हैं। हमारी फिल्म का टाइटल बहुत सटीक है और यह फिल्म हास्य और विनोद से भरी हुई है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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