स्पेन की राष्ट्रीय टीम से जुड़े बस्केटस, एल्बीओल और डी जिया

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मिडफील्डर सर्जियो, राउल एल्बीओल और गोलकीपर डेविड डी जिया गुरुवार को सर्जियो रामोस के साथ स्पेन की राष्ट्रीय टीम से जुड़ गए। रामोस नए कप्तान के रूप में टीम से जुड़े हैं। समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट के अनुसार, ये तीनों खिलाड़ी आंद्रेस इनिएस्ता, डेविड सिल्वा और गेरार्ड पिक के अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल से संन्यास लेने के बाद टीम से जुड़े हैं। स्पेन को फीफा विश्वकप में रूस से प्री-क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर हो जाना पड़ा था।

रामोस टीम के पहले ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने स्पेन के लिए 156 मैच खेले हैं। उनके अलावा बस्केटस ने 107 मैच खेले हैं। तीन साल बाद टीम में लौटे एल्बीओल ने 51 और डी जिया ने 33 मैच खेले हैं।

स्पेन को शनिवार को विम्बले स्टेडियम में यूएफा नेशंस लीग में इंग्लैंड के खिलाफ मैच खेलना है। इसके तीन दिन बाद वह क्रोएशिया से भिड़ेगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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