बांदा जिला प्रशासन खुद धरने पर, बैरंग लौटे फरियादी

0

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ जाने से जिला प्रशासन का कामकाज ठप हो गया और दूर-दराज से आने वाले फरियादियों को बैरंग लौटना पड़ा। उप्र राजस्व महासंघ के बैनर तले गुरुवार को जिले की सभी पांच तहसीलों के तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ, लेखपाल संघ समेत पांच अलग-अलग संघों से जुड़े अन्य अधिकारी व कर्मचारी अपनी वेतन संबंधी मांगों को लेकर धरने पर बैठ रहे, जिससे दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्र से आए फरियादियों को बैरंग लौटना पड़ा है।

एक सवाल के जवाब में सदर तहसीलदार और महासंघ के संरक्षक अवदेश कुमार निगम ने कहा कि “कभी-कभी डॉक्टर को भी इलाज की जरूरत होती है। उसी तरह आज समझ लीजिए कि हम लोग हमेशा दूसरों की समस्याएं सुलझाते हैं, आज हमें भी इलाज की जरूरत है, इसलिए हम मरीजों की तरह लेट गए हैं।”

इसी दौरान कमासिन के राजकीय कस्तूरबा गांधी विद्यालय की कई छात्राएं अपनी गंभीर समस्याएं लेकर कलेक्ट्रेट आईं और उन्हें वापस लौटना पड़ा। ये सभी छात्राएं जिलाधिकारी के कार्यालय तो पहुंचीं, लेकिन धरने पर बैठे अधिकारियों के भाषण के शोर की वजह से कुछ बता नहीं पाईं।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleमध्य प्रदेश में आंशिक बादल छाए
Next articleशिखर वार्ता: कश्मीर पर अपना स्पष्ट रुख रखेगा भारत
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here