बैडमिंटन : सिंधु, प्रणॉय इंडोनेशिया ओपन के क्वार्टर फाइनल में

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वर्ल्ड नंबर-3 भारत की महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और पुरुष खिलाड़ी एच.एस. प्रणॉय ने गुरूवार को अपने-अपने मुकाबले जीतकर इंडोनेशिया ओपन के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। अपना 23वां जन्मदिन बना रही रियो ओलम्पिक की रजत पदक विजेता सिंधु ने जापान की आया ओहोरी को 21-17, 21-14 से मात देकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। सिंधु ने वर्ल्ड नंबर-17 ओहोरी को 36 मिनट में पराजित किया।

सिंधु ने ओहोरी के खिलाफ अब अपना करियर रिकॉर्ड 5-0 कर लिया है। क्वार्टर फाइनल में सिंधु का सामना चीन की ही बिंगजियाओ से होगा जिनके खिलाफ सिंधु का करियर रिकॉर्ड 5-5 का है।

इस बीच अपने पहले मुकाबले में चीनी दिग्गज लिन डेन पर अप्रत्याशित जीत दर्ज करने वाले प्रणॉय पुरुष एकल वर्ग के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए हैं।

आठवी सीड प्रणॉय ने चीनी ताइपे के जु वेई वांग को तीन गेमों में तक चले एक घंटे के मुकाबले में 21-23, 21-15, 21-13 से हराया। क्वार्टर फाइनल में प्रणॉय का सामना चीन के शी युकी से होगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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