बैडमिंटन : सिंधु ऑल इंग्लैंड ओपन के दूसरे दौर में, श्रीकांत हारे

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भारत की अनुभवी महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पी.वी. सिंधु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए यहां जारी ऑल इंग्लैंड ओपन के दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया जबकि किदांबी श्रीकांत को पहले ही दौर में हार का सामना करना पड़ा। दुनिया की छठे नंबर की खिलाड़ी सिंधु ने बुधवार को महिला एकल के अपने पहले दौर में अमेरिका की झांग बीवन को सीधे गेम में 21-14, 21-17 से मात दी। सिंधु ने वर्ल्ड नंबर-14 बीवन को 42 मिनट में हराया।

इस जीत के साथ ही सिंधु ने बीवन के खिलाफ अपना करियर रिकॉर्ड 6-4 का कर लिया है। दूसरे दौर में सिंधु का सामना कोरिया की सुंग जी हयून से होगा।

पुरुष एकल में श्रीकांत अपने पहले दौर की बाधा नहीं पार सके। श्रीकांत को वर्ल्ड नंबर तीन चीन के चेन लोंग के हाथों 43 मिनट तक चले मुकाबले में 15-21, 16-21 से हार झेलनी पड़ी।

मिश्रित युगल में प्रणव जेरी चोपड़ा और एन सिक्की रेड्डी की जोड़ी को टॉप सीड चीनी ताइपे के सी वेई झेंग और या क्यिोंग हुआंग की जोड़ी से 13-21, 21-11, 17-21 से हार का सामना करना पड़ा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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