बैडमिंटन : सायना, समीर और जयराम बार्सिलोना मास्टर्स के क्वार्टर फाइनल में

0

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल, समीर वर्मा और अजय जयराम ने यहां जारी बार्सिलोना स्पेन मास्टर्स टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। पांचवीं सीड सायना ने गुरुवार को महिला एकल के प्री-क्वार्टर फाइनल में यूक्रेन की मारिया उलितिना को 21-10, 21-19 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। क्वार्टर फाइनल में अब सायना का सामना तीसरी सीड थाईलैंड की बुसानन ओंगबामरुंगफान से होगा।

पुरुष एकल में समीर ने अंतिम-16 में जर्मनी के काई शेफर को 21-14, 16-21, 21-15 से मात देकर अंतिम-8 में अपनी जगह पक्की की।

वहीं, जयराम ने प्री-क्वार्टर फाइनल में हमवतन और तीसरी सीड किदांबी श्रीकांत को 21-6, 21-17 से हराकर अंतिम-8 में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल में जयराम का सामना फ्रांस के थॉमस रॉक्सेल से होगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleशाहीनबाग : दूसरे दिन भी पहुंचे वार्ताकार, नहीं निकला कोई हल
Next articleबैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व ब्रांच मैनेजर को 10 साल की जेल
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here