बैडमिंटन : लक्ष्य सेन करियर की सर्वश्रेष्ठ रैकिंग 32वें नंबर पर पहुंचे

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इस साल रिकॉर्ड अपना पांचवां अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीतने वाले भारत के उभरते बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन बीडब्ल्यूएफ रैकिंग में 32वें नंबर पर पहुंच गए हैं। लक्ष्य के करियर की यह सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग है। 18 साल के युवा खिलाड़ी ने हाल ही में बांग्लादेश इंटरनेशनल चैलेंज के फाइनल में मलेशिया के लीओंग जुन हाओ को 22-20, 21-18 से हराकर अपना पांचवां अंतर्राष्टीय खिताब जीता था।

लक्ष्य पिछले 12 महीनों के दौरान छह बार किसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे हैं, जिसमें से पिछले तीन महीनों में पांच खिताब जीते हैं। इससे पहले उन्होंने स्कॉटिश ओपन, सारलोरलक्स, नीदरलैंडस ओपन, बेल्जियम ओपन का खिताब जीता था।

ताजा रैंकिंग में कोई भी भारतीय टॉप-10 में शामिल नहीं है। बी. सुमित रेड्डी और किदाम्बी श्रीकांत क्रमश: 11वें और 12वें नंबर पर हैं जबकि पारुपल्ली कश्यप 23वें स्थान पर बने हुए हैं।

महिला एकल में पीवी सिंधु छठे पायदान पर हैं। वहीं, सायना नेहवाल को एक स्थान का नुकसान हुआ है और वह 11वें नंबर पर खिसक गई हैं। युगल वर्ग में भी कोई भी भारतीय जोड़ी टॉप-10 में शामिल नहीं है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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