Badminton : जयराम ने स्विस ओपन के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया

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भारत के अजय जयराम ने यहां जारी स्विस ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में गुरुवार को अपनी जगह बना ली। वर्ल्ड नंबर-60 जयराम ने अपने दूसरे दौर के मुकाबले में वर्ल्ड नंबर-12 डेनमार्क के रेसमस गेमको को तीन गेमों तक चले मुकाबले में हराया। जयराम ने तीसरी सीड गेमको को 21-18, 17-21, 21-13 से पराजित किया। भारतीय खिलाड़ी ने यह मुकाबला 65 मिनट में अपने नाम किया।

क्वार्टर फाइनल में अब जयराम का सामना आठवीं सीड थाईलैंड के कुनलावुत विदर्तसन से होगा, जिन्होंने एक अन्य मुकाबले में विश्व रैंकिंग में 32वें नंबर के खिलाड़ी भारत के सौरभ वर्मा को 21-17 21-14 से पराजित किया।

इससे पहले, चौथी सीड श्रीकांत ने अपने दूसरे दौर के मुकाबले में फ्रांस के थॉमस रक्सेल को हराया। पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 श्रीकांत ने 52 मिनट तक चले मुकाबले में रक्सेल को 21-10, 14-21, 21-14 से मात दी।

क्वार्टर फाइनल में अब श्रीकांत का सामना छठी सीड थाईलैंड के केंटाफोन वांगचेरीओन और नीदरलैंडस के मार्क केलीजोउ के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा।

न्यूज स़ोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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