बैडमिंटन : बंद दरवाजों के बीच हो सकता है इंडिया ओपन

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देश भर में फैले कोरोनावायरस के कारण कई खेल गतिविधियां या तो स्थगित कर दी गई या फिर रद्द कर दी गई है। लेकिन यहां 24 से 29 मार्च तक होने वाला इंडिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगा और हो सकता है कि यह बंद दरवाजों के बीच खेला जाए। भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) और विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) ने बुधवार को संयुक्त बयान जारी करके कहा कि यह टूर्नामेंट पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगा।

बीएआई ने कहा, “खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त एहतियाती कदम उठाए जाएंगे। हो सकता है कि इसे बंद दरवाजों के बीच आयोजित किया जाए।”

दुनियाभर में फैले कोरोनावायरस के कारण फरवरी से मार्च तक होने वाले अब तक के पांच बीडल्यूएफ बैडमिंटन टूर्नामेंटों को या तो रद्द कर दिया गया है या फिर स्थगित कर दिया गया है। इनमें पोलिश ओपन, वियतनाम इंटरनेशनल चैलेंज, पुर्तगाल इंटरनेशनल चैंपियनशिप, जर्मन ओपन और चाइना मास्टर्स शामिल हैं।

कोरोनावायरस के कारण ही सात भारतीयों ने पिछले सप्ताह ही आल इंग्लैंड ओपन से अपना नाम वापस ले लिया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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