बैडमिंटन : भारत एशियन जूनियर चैम्पियनशिप के क्वार्टर फाइनल में

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कोरिया के खिलाफ अपना अंतिम ग्रुप मैच हारने के बावजूद भारत ने एशियन जूनियर बैडमिंटन चैम्पियनशिप (मिश्रित टीम स्पर्धा) के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। क्वार्टर फाइनल में भारत का सामना इंडोनेशिया से होगा।

चैंपियनशिप के दूसरे दिन भारत को अपने अंतिम ग्रुप मैच में कोरिया के हाथों 1-4 से हार का सामना करना पड़ा, जिसमें मेइसनाम मेइराबा एकमात्र विजेता रहे। भारत ने चैंपियनशिप के पहले दिन मकाऊ चीन, और मंगोलिया को मात दे 5-0 से हराया था।

मणिपुर के मेइराबा ने कोरिया के हियोन सेयुंग पार्क को एक घंटे 32 मिनट में मात दी।

मिश्रित युगल में डिंग्कु सिंह कोंथोउजाम और रितिका ठाकेर को एक संघर्षपूर्ण मुकाबले में डोंग जु कि और युज जी ली के हाथों 56 मिनट में 21-19, 12-21, 12-21 से मात खानी पड़ी।

महिला युगल में तनिशा क्रास्टो और ट्रेसा जोली को यंग बिन जी युन जि ली के खिलाफ 16-21, 21-16, 12-21 से हार का सामना करना पड़ा।

लड़कों के युगल वर्ग में ईशान भटनागर और विष्णु वर्धन को डोंग जु कि और जून योंग किम की जोड़ी से 17-21, 15-21 से जबकि लड़कियों के एकल वर्ग में माल्विका बंसोड को गा लाम किम के हाथों 10-21, 8-21 से शिकस्त झेलनी पड़ी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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