बैडमिंटन : गायत्री गोपीचंद, लक्ष्य सेन जीते खिताब

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गायत्री गोपीचंद और लक्ष्य सेन ने रविवार को यहां दमदार प्रदार्शन करते हुए सीनियर रैंकिंग टूर्नामेंट के महिला और पुरुष वर्ग का खिताब अपने नाम किया। गोपीचंद ने महिला एकल एवं युगल वर्ग का खिताब जीता जबकि सेन ने पुरुष युगल वर्ग में जीत दर्ज की।

एकल वर्ग के फाइनल में 13वीं सीड 16 वर्षीय गोपीचंद ने तन्वी लाड को सीधे गेमों में 21-19, 21-16 से शिकस्त दी। यह मुकाबला केवल 37 मिनट तक चला।

गोपीचंद को हालांकि, युगल वर्ग में जीत के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने रुतपर्णा पंडा के साथ मिलकर शिखा गौतम और अश्विनी भट की जोड़ी को तीन गेम तक चले कड़े मैच में 19-21, 21-14, 21-10 से मात दी।

पुरुष एकल वर्ग में सेन ने दमदार प्रदर्शन किया। छठी सीड सेन ने दूसरी सीड राहुल यादव को 23-25, 21-14, 21-13 से हराया।

कृष्णा प्रसाद और ध्रुव कपिला की जोड़ी ने पुरुष युगल वर्ग का खिताब जीता। उन्होंने श्री कृष्ण पोडिले और गौस शैक की जोड़ी को सीधे गेमों में 23-21, 21-17 से मात दी।

न्यूज स्त्रोत ईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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