आयुष्मान भारत से जुड़ेंगे डेढ़ लाख हेल्थ सेंटर

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आयुष्मान भारत योजना को बेहतर बनाने के लिए देशभर के करीब डेढ़ लाख हेल्थ सब सेंटर्स व प्राथमिक चिकित्सा केंद्रो को आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में बदला जाएगा। यह जानकारी शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने दी।

केंद्रीय मंत्री चौबे के मुताबकि दिसंबर 2022 तक यह सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी। विस्तारित सेवाओं के अंर्तगत गैर संचारी रोग, मानसिक स्वास्थ्य, आंख, नाक, कान, ओरल केयर, ट्रॉमा केयर, नेत्र विज्ञान, बुढ़ापे संबंधी रोग व पीड़ाहर उपचार भी आयुषमान स्वास्थ्य केंद्रो पर उपलब्ध होगा। फिलहाल अधिकांश आयुष्मान स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रजनन, शिशु केयर व संचारी रोगों का उपचार किया जा रहा है। शेष सुविधाएं आयुषमान भारत बीमा के तहत बड़े अस्पतालों में प्राप्त की जा सकती हैं।

गौरतलब है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंर्तगत 10.74 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है। इसके तहत बीमा प्राप्त व्यक्ति सालाना 5 लाख तक का उपचार पाने का हकदार है।

न्यूज स्त्रोत आईएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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