अयोध्या विवाद: पांचवें दिन की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, क्या विवादित स्थल पर मंदिर था

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जयपुर। अयोध्या में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर पांचवें दिन की सुनवाई के दौरान मंगलवार को इस मुद्दे पर एक बार बहस फिर शुरू हुई और इस विवादित स्थल पर क्या पहले कोई मंदिर था इस इस बात पर चर्चा करी गई.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने मस्जिद के निर्माण में होने से पहले इस विवादित स्थल पर कोई मंदिर होने संबंधी सवाल पर बहस शुरू करी है और उन्होंने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन न्यायाधीशों की पीठ अपने फैसले में यह कहा है कि विवादित स्थल पर मंदिर था.

वहीं इसके अलावा वैद्यनाथन ने यह भी कहा है कि हाईकोर्ट के जस्टिस एस यू खान ने अपने फैसले में कहा था कि मंदिर के अवशेषों पर मस्जिद का निर्माण करा गया था. वहीं मीडिया में आई जानकारी के अनुसार वैद्यनाथन ने कहा कि 12 दिसंबर 1949 जब से विवादित जगह पर मूर्तियां रखी गई है ना तो वहां पर नमाज हुई है और ना ही मुस्लिम पक्ष का रोका उस जमीन पर कोई कब जा रहा है.

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे जस्टिस धनंजय चंद्रचूड़ जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल कर गए थे.

वही आपको बता दें कि इससे पहले रामलला विराजमान की ओर से ही वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरण ने पीठ से कहा था कि वह अपने समक्ष आए सभी मामलों को पूर्ण न्याय करना चाहिए. वही संविधान पीठ ने पिछले शुक्रवार को पर आसन से जाना चाहता कि क्या रघुवंश राजघराने से कोई भी वहां अयोध्या में रहता है.

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