‘राष्ट्रवाद’ के इस्तेमाल से परहेज करें, यह ‘हिटलर, नाजीवाद’ का संकेत देता है : भागवत

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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि लोगों को ‘राष्ट्रवाद’ शब्द के इस्तेमाल से परहेज करना चाहिए। यह ‘हिटलर व नाजीवाद’ का संकेत देता है। भागवत ने रांची में आरएसएस के कार्यक्रम में कहा, “राष्ट्रवाद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करें। ‘राष्ट्रीय’, ‘राष्ट्रीयता’, ‘राष्ट्र’ का इस्तेमाल करें। ‘राष्ट्रवाद’ अर्थ हिटलर, नाजीवाद और फासिज्म है। संघ का उद्देश्य देशभक्ति व हिंदुत्व की भावना को बढ़ावा देना है।”

भागवत यहां आरएसएस के पांच दिवसीय कार्यक्रम के लिए हैं।

उन्होंने कहा, “संघ का उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करने के अलावा कुछ नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि संघ देश की संघीय व्यवस्था में हस्तक्षेप करता है। स्वयंसेवक अपने उद्देश्य के लिए समर्पित हैं। हमें अपने देश की संस्कृति पर गर्व है। हमें अपने देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कार्य करना होगा। हमें भारत को विश्व गुरु बनाना है।”

उन्होंने कहा, “संघ खुद को बड़ा नहीं बनाना चाहता और ऐसा ही भारत के साथ भी है। बहुत से देश जो बहुत बड़े हो गए अपने पतन को प्राप्त हुए। आज दुनिया के सुपरपॉवर देश दुनिया के संसाधनों का खुद के लिए इस्तेमाल करते हैं और अपनी इच्छाएं दूसरे देशों पर थोपना चाहते हैं। विद्वानों का मानना है कि किसी देश का बड़ा हो जाना दुनिया के लिए सही नहीं है।”

भागवत ने कहा, “भारत जब भी बड़ा बना तो दुनिया का हित ही किया। आज दुनिया को हमारी जरूरत है। संघ के भाषणों से ही भारत विश्व गुरु बनेगा, ऐसा नहीं है। राष्ट्र निर्माण के कार्य के लिए कोई आपका आभार प्रकट नहीं करेगा। देश हमें सब कुछ देता है, हमें भी देश को देना सीखना होगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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