सरदार पटेल के शहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए अनिश्चितकालीन उपवास, जानिए पूरा मामला !

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गुजरात के आनंद जिला स्थित करमसद के निवासियों के एक वर्ग ने सोमवार से बेमियादी उपवास शुरू किया है। उनकी मांग है कि भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल से संबंधित शहर को राष्ट्रीय पहचान प्रदान किया जाए। इस मांग को लेकर शहर के निवासियों की ओर से गठित सरदार हितरक्षक समिति के सदस्य बिपिन पटेल ने कहा, “हम इस शहर को विशेष दर्जा दिलवाने की मांग काफी समय से कर रहे हैं। पटेल इसी शहर में पले-बढ़े थे। हमने केंद्र और राज्य सरकारों से भी बात की, मगर किसी ने हमारी मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया है।”

उन्होंने बताया कि सबसे पहले 1995 में शहर के निवासियों ने इस बाबत अपना प्रस्ताव प्रदेश सरकार को दिया था। उसी समय महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर के लिए भी ऐसा ही प्रस्ताव दिया गया था। पोरबंद को दर्जा प्रदान किया गया। मगर, करमसद निवासियों की मांग पर अबतक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

सरदार पटेल 31 अक्टूर, 1875 को नाडियाड में पैदा हुए थे, लेकिन उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा करमसद में ही ग्रहण की, जहां उनके बड़े भाई रहते थे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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