ऑस्ट्रेलिया : कम वेतन देने पर पूर्व प्रोफेसर के खिलाफ मामला दर्ज

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ऑस्ट्रेलिया में अर्थशास्त्र के एक पूर्व प्रोफेसर द्वारा उसकी दुकान पर कार्यरत विदेशी कर्मचारियों को कथित रूप से मात्र 10 डॉलर प्रति घंटे की दर से वेतन देने का मामला अदालत पहुंच गया है। ऑस्ट्रेलिया सरकार की एक स्वतंत्र वैधानिक एजेंसी ‘फेयर वर्क ऑम्बुड्समैन’ के हवाले बताया कि वर्तमान में मेलबर्न में एक किराने की दुकान चला रहे अर्थशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर जॉर्डन शान पर आरोप है कि उन्होंने अपनी दुकान पर काम करने वाले दक्षिण कोरिया के दो कर्मचारियों को साल 2016 में चार महीने से कम का वेतन 14,015 ऑस्ट्रेलियन डॉलर कम दिया।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें 10 से 12.50 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दर से वेतन दिया गया, जबकि न्यूनतम दर 19.44 डॉलर प्रतिघंटा है। एजेंसी के कार्यकारी प्रमुख क्रिस्टेन हन्ना ने कहा, “कम मजदूरी, कमजोर कर्मचारी और एक कर्मचारी का नोटिस काल में होने जैसे तथ्यों से अपराध की गंभीरता बढ़ जाती है और यही तथ्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई में मुख्य भूमिका निभाएंगे।”

 

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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