जानिए सूर्य के राशि परिवर्तन के शुभ अशुभ असर और नियम

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हर व्यक्ति के जीवन में ग्रह नक्षत्र और ज्योतिष शास्त्र का विशेष महत्व होता हैं वही ऐसा भी कहा जाता हैं कि ग्रह नक्षत्र अगर उसका साथ दें तो जीवन में वह कभी भी असफल नहीं हो सकता हैं वही ज्योतिषण गणना के मुताबिक सभी ग्रह एक निश्चित अवधि के अंतराल में एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन करते हैं वही सूर्य हर महीने एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में चला जाता हैं। वही सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं इस महीने 17 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि को छोड़कर तुला राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं जहां पर वह करीब एक माह तक तुला राशि में ही रहेगा। वही सूर्य का तुला राशि में जाना नीच का माना जाता हैं तुला सूर्य के शत्रु ग्रह शुक्र की राशि हैं सूर्य के तुला राशि में गोचर से कुछ व्यक्तियों के जीवन में अशुभ प्रभाव पड़ता हैं।

वही जब किसी मनुष्य की कुंडली में सूर्य का शुभ प्रभाव होता हैं तो संबंधित व्यक्ति को नौकरी व्यापार में सफलता हासिल होती हैं वही सूर्य के शुभ होने से मनुष्य का आत्मविश्वास भी बढ़ता हैं और मान सम्मान भी प्राप्त होता हैं वही अगर कुंडली में सूर्य का अशुभ प्रभाव होता हैं तो इससे संबंधित मनुष्य असफलता को प्राप्त करता हैं जीवन में रुकावटें और परेशानियां भी बढ़ने लग जाती हैं। इसके अलावा धन हानि भी होती हैं।

वही शास्त्रों में भी कहा गया हैं कि हर दिन सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता हैं वही हर दिन इनके दर्शन प्राप्त होते हैं बहुत से व्यक्ति इस नियम का पालन भी करते हैं मगर इसके ​भी नियम हैं जिन्हें जानकर सूर्य को जल दें। तो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इसका लाभ प्राप्त किया जा सकता हैं वही ज्योतिष में बताया गया हैं, कि जिस किसी की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में होता हैं तो उसे रोजाना सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। सूर्य के नियमों का पालन करते हुए जल देना चाहिए।

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