15 अगस्त: आजादी के परवानों के ऐसे 5 गीत जिन पर अंग्रेजी हुकुमत ने लगा दी थी पाबंदी

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जयपुर। कल हमारा देश अपना 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कल ही के दिन 15 अगस्त 1947 को भारत 200 साल तक अंग्रेजों का गुलाम रहने के बाद आजाद हुआ था। इस दिन को हर 1947 के बाद से ही हर साल पुरे भारत में एक त्योहार की तरह हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन हर विद्यालय तथा सरकारी कार्यालयों पर झंड़ा रोहण किया जाता है। तथा मिठाईयां बांटी जाती है। इस दिन लोग उन अमर सहीदों को याद करते हैं। तथा उइनकी सहादत को प्रणाम करते हैं जिन्होंने अपने देश के लिए अपने प्रणों की बली दे दी थी।
आज हम आपको इस आर्टिकल में ऐसे कुछ गीतों के बारे में बताने जा रहे हैं। जो कि हमारे देश के अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानियों ने लिखे थे। जो कि लोगों में अंग्रेजी हुकुमत से लड़ने का जोश भर देते थे। लेकिन इन गीतों को अंग्रेजी हुकुमत ने इन गीतों को जब्त कर लिया था। तथा आजादी के उन परवानों को अंग्रेजी हुकुमत की यातनाओं का शिकार होना पड़ा था। आज हम आपके लिए वे देशभक्ती गीत लेकर आए हैं।

1 नाम – देशभगत का प्रलाप
गीतकार – कमल
हमारा हक है हमारी दौलत़ किसी के बाबा का जर नहीं है,
है मुल्क भारत वतन हमारा, किसी की खाला का घर नहीं है।
ये आत्मा तो अजर-अमर है निसार तन-मन स्वदेश पर है
है चीज क्या जेल, गन, मशीनें, कजा का भी हमको डर नहीं है।
न देश का जिनमें प्रेम होवे, दु:खी के दु:ख से जो दिल न रोए,
खुशामदी बन के शान खोए वो खर है हरगिज बशर नहीं है।
हुकूक अपने ही चाहते हैं न कुछ किसी का बिगाड़ते हैं,
तुझे तो ऐ खुदगरज ! किसी की भलाई मद्देनजर नहीं है।
हमारी नस-नस का खून तूने बड़ी सफाई के साथ चूसा,
है कौन-सी तेरी पालिसी वो कि जिसमें घोला जहर नहीं है।
बहाया तूने हैं ख़ूँ उसी का, है तेरी रग-रग में अन्न जिसका,
बता दे बेदर्द तू ही हक से, सितम यह है या कहर नहीं है।
जो बेगुनाहों को सताता, कभी न वो सुख से बैठ पाता,
बड़े-बड़े मिट गए सितमगर, तुझे क्या इसकी खबर नहीं है।


2 गीत का नाम- वो दिन भी आएगा
गीतकार – गनी
वो दिन भी आएगा जब फिर बहार देखेंगे,
गरीब हिंद को हम ताजदार देखेंगे।
घड़ी वो दूर नहीं, ऐ वतन के शैदाओं !
कि मुल्के हिंद को फिर पुरबहार देखेंगे।
अदू की सख्तियाँ उल्टा असर दिखाएँगी,
वो गाफिलो को फिर अब होशियार देखेंगे।
बढ़े चलो ऐ जवानों फतह हमारी है,
वतन को जल्द ही बाइख्तियार देखेंगे।
हरीफ सख्तियाँ कर-करके हार जाएगा,
गली में गाँधी के नुसरत का हार देखेंगे।
मिलेगा हिंद को सौराज एक दिन खुर्शीद,
खिजाँ को देखने वाले बहार देखेंगे।


3 गीत का नाम -जलियाँवाला बाग
गीतकार – सरजू
बेगुनाह पर बमों की बेखतर बौछार की,
दे रहे हैं धमकियाँ बंदूक और तलवार की।
बागे-जलियाँ में निहत्थों पर चलाईं गोलियाँ,
पेट के बल भी रेंगाया, जुल्म की हद पार की।
हम गरीबों पर किए जिसने सितम बेइंतहा,
याद भूलेगी नहीं उस डायरे-बद्कार की।
या तो हम मर ही मिटेंगे या तो ले लेंगे स्वराज,
होती है इस बार हुज्जत खत्म अब हर बार की।
शोर आलम में मचा है लाजपत के नाम का,
ख्वार करना इनको चाहा अपनी मिट्टी ख्वार की।
जिस जगह पर बंद होगा शेरे-नर पंजाब का,
आबरू बढ़ जाएगी उस जेल की दीवार की।
जेल में भेजा हमारे लीडरों को बेकसूर,
लॉर्ड रीडिंग तुमने अच्छी न्याय की भरमार की।
खूने मजलूमों की सूरत अब तो गहरी धार है,
कुछ दिनों में डूबती आबरू अगियार की।

4 गीत का नाम- भारत की आन
गीतकार – रौशन
आन भारत की चली इसको बचा लो अब तो,
कौम के वास्ते दु:ख-दर्द उठा लो अब तो।
देश के वास्ते गर जेल भी जाना पड़े,
शौक से हथकड़ी कह दो कि लगाओ हमको।
है मुखालिफ जो कोई उसका न कुछ खौफ करो,
जेल का डर जो दिलों में है निकालो अब तो।
अब नहीं वक्त कि तकलीफ को महसूस करो,
बोझ जो ‍सिर पर पड़े उसको उठा अब तो।
जो करो दिल से करो, मुल्क की खातिर करो,
बात सच कहता है ‘रोशन’ कि न टालो अब तो।


5 गीत का नाम – कौमी झंडा
गीतकार – शामलाल पार्षद
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा
सदा शक्ति सरसाने वाला, प्रेम-सुधा बरसाने वाला
वीरों को हर्षाने वाला, मातृभूमि का तन-मन सारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
स्वतंत्रता के भीषण रण में, लखकर बढ़े जोश छन-छन में
काँपे शत्रु देखकर मन में, मिट जाए भय संकट सारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
इस झंडे के नीचे निर्भय, ले स्वराज्य हम अविचल निश्चय,
बोलो भारत माता की जय, स्वतंत्रता है ध्येय हमारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
इसकी शान न जाने पाए, चाहे जान भले ही जाए
विश्व विजय करके दिखलाए, तब होवे प्रण पूर्ण हमारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

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