ATP Finals : मेदवेदेव ने श्वाट्रजमैन को हरा सेमीफाइनल में किया प्रवेश

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रूस के टेनिस खिलाड़ी डेनिल मेदवेदेव ने अर्जेंटीना के डिएगो श्वाट्रजमैन को सीधे सेटों में मात दे एटीपी फाइनल्स के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। मेदवेदेव ने श्वाट्रजमैन को 6-3, 6-3 से मात दी।

इस जीत के बाद मेदवेदेव ने ग्रुप टोक्यो 1970 का अंत 3-0 से किया। पिछले साल वह इस टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं जीत पाए थे। अब सेमीफाइनल में उनका सामना स्पेन के राफेल नडाल से होगा।

मैच के बाद मेदवेदेव ने कहा, “मैं अपने पहले दो मैचों में शानदार खेला। मुझे लगता है कि अजेय रहना आत्मविश्वास के लिए अच्छा है। मैं मैच जीतना चाहता था, इसलिए मैं इस बात से खुश हूं कि मैंने यह किया। मैंने आज सर्विस अच्छी की इससे मैं पूरे मैच में अच्छा कर सका।”

मेदवेदेव के खिलाफ नडाल का रिकार्ड 3-0 का है। मेदवेदेव ने नडाल के साथ खेले जाने वाले मैच को लेकर कहा, “मैं बिग थ्री के साथ खेलना पसंद करता हूं। मैं जब युवा था, रैकेट पकड़ना शुरू किया था, और टेनिस में मेरी दिलचस्पी बढ़ रही थी.. मैंने ग्रैंड स्लैम देखना शुरू किया। पहले रोजर सब कुछ जीतते थे, फि राफा आए जिन्होंने अपना नाम बनाया और फिर जोकोविच। इन तीनों के खिलाफ खेलना अच्छा लगता है।”

मेदवेदेव 2009 के बाद पहले ऐसे रूसी खिलाड़ी हैं जो लगातार दो साल एटीपी फाइनल्स खेल रहे हैं। उनसे पहले निकोलाए डावीडेंको ने (2005-09) लगातार एटीपी फाइनल्स खेले थे। वह अभी तक एक भी सेट नहीं हारे हैं। ग्रुप दौर में वह इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जो एक भी मैच नहीं हारे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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