बेटी की मौत के बावजूद विश्व कप में खेलेंगे आसिफ अली

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विश्व कप के लिए पाकिस्तान टीम में शामिल किए गए बल्लेबाज आसिफ अली ने बेटी की मौत के बावजूद टूर्नामेंट में खेलेंगे।

क्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ की बेटी को स्टेफ 4 कैंसर था, जिसका कि अमेरिका में इलाज चल रहा था, जहां उनकी मौत हो गई।

आसिफ को सोमवार को ही विश्व कप के लिए पाकिस्तान टीम में चुना गया था, लेकिन अब वह टीम को छोड़कर अमेरिका जाएंगे। आसिफ को आबिद अली के स्थान पर टीम में चुना गया है।

पाकिस्तान के मुख्य चयनकर्ता इंजमाम उल हक ने सोमवार को कहा, “आबिद की जगह आसिफ को चुनना मुश्किल फैसला था। हमें मध्यक्रम में, खासकर छठे-सातवें क्रम में पावर-हिटर की जरूरत थी। आसिफ ने इंग्लैंड में ऐसी दो पारियां खेलीं। उनकी इन्हीं पारियों ने विश्व कप के लिए हमें विकल्प दे दिया।”

पाकिस्तान टीम प्रबंधन अब आसिफ के अमेरिका जाने का प्रबंध करेगा।

इंजमाम ने आसिफ को लेकर कहा, “आसिफ इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनके अमेरिका जाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि वे पाकिस्तान के पहले अभ्यास मैच से पहले लौट आएंगे, लेकिन अगर यदि वह उस दिन तक नहीं लौट सके, तो भी हम उनका तब तक इंतजार करेंगे, जब तक कि वे लौटकर नहीं आ जाते।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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