एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता प्रणब, शिबनाथ सम्मानित

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एशियाई खेलों के 18वें संस्करण में ब्रिज में स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रणब बर्धन और शिवनाथ सरकार को यहां इन्विटेशनल ब्रिज टूर्नामेंट से इतर शनिवार को सम्मानित किया गया। इन दोनों के अलावा कांस्य पदक विजेता देबर्ता मजूमदार और उनके कोच तथा नोन प्लेइंग कप्तान देबाशीष रॉय को भी सम्मानित किया गया। अन्य कांस्य पदक विजेता सुमित मुखर्जी इस मौके पर किसी कारणवश उपस्थित नहीं हो सके।

इस बीच पूर्व अंतर्राष्ट्रीय देबाशीष रॉय (कप्तान), एसके लेंगर, उत्तम गुप्ता, कमल मुखर्जी और सुमन मुखर्जी की टीम शानदार वापसी करते हुए स्विस लीग के दूसरे दिन 10वें राउंड के आखिर में 137.71 के जीत अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। वहीं दक्षिण कालीकाट सांगसद (डीकेएस) शुक्रवार वाले प्रदर्शन को यहां नहीं दोहरा पाए। उन्होंने 133.40 के जीत अंक के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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