Ram temple आंदोलन के सूत्रधार अशोक सिंघल को जयंती पर किया याद

0

राम मंदिर आंदोलन के सूत्रधार रहे अशोक सिंघल को उनकी जयंती पर रविवार को याद किया गया। महर्षि वाल्मीकि शोध संस्थान की ओर से आयोजित वेबिनार में विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उन्हें महामानव बताया। बंसल ने कहा कि अशोक सिंहल का स्पष्ट मानना था कि जब महर्षि वाल्मीकि के बिना भगवान श्रीराम की कल्पना अधूरी है तो अनुसूचित जाति, जनजाति व वनवासी बंधुओं की प्रगति के बिना राष्ट्र भी आगे कैसे बढ़ सकता है? 1989 में उन्होंने काशी के डोम राजा को न सिर्फ स्वयं उनके घर जाकर विराट हिंदू सम्मेलन का निमंत्रण दिया, बल्कि संतों के मंच के मध्य सत्कार पूर्वक बैठाया और उनके यहां भोजन भी किया।

बंसल ने यह भी कहा कि हजारों एससी-एसटी बंधुओं को पुजारी और पुरोहित के रूप में प्रशिक्षत कर मंदिरों व घरों में धार्मिक कर्मकांडों के लिए तैयार करने का बीड़ा अशोक सिंघल ने ही उठाया था जो आज सामाजिक समरसता के क्षेत्र में अनुपम उदाहरण बन चुका है।

उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के प्रयासों के कारण ही आज एकल अभियान के माध्यम से बिना किसी सरकारी मदद के एक लाख से अधिक ग्राम शिक्षा मंदिरों का संचालन हो रहा है।

न्यूज स्त्रोत आइएनएस

SHARE
Previous articleIPL-2020 : सैमसन, स्मिथ की मेहनत को तेवतिया ने मंजिल पर पहुंचाया (राउंडअप)
Next articleसरकार की सख्ती के बावजूद किसान क्यों जलाते हैं stubble ?
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here