अशोक लेलैंड ने इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र का उद्घाटन किया

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वाणिज्यिक वाहन निर्माता अशोक लेलैंड ने शुक्रवार को कहा कि उसने यहां एन्नोर में अपने इलेक्ट्रिक वेहिकल (इवी) संयंत्र का उद्घाटन किया है।

कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह देश का पहला डिजायन, प्रोटोटाइप, टेस्टिंग, प्रोसेस प्रोटोटाइपिंग और सोल्यूशंस डिजायन का समेकित संयंत्र है।

बयान में कहा गया, “इस संयंत्र के इन हाउस सुविधाओं में मोटर्स की इंजीनियरिंग, प्रोटोटाइपिंग और टेस्टिंग, बैटरी मॉडयूल्स और पैक्स व पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स लैब शामिल हैं। इसे तेजी से बदलते और विकसित होते बाजार को ध्यान में रखकर बनाया गया है।”

कंपनी के प्रबंध निदेशक विनोद के. दासारी के हवाले से एक बयान में कहा गया, “हमारे 70 सालों में हमने हमारे भविष्य की आधारशिला रखी है। एन्नोर का इवी सेंटर हमें ईमोबिलिटी के विकास में मदद करेगा।”

अशोक लेलैंड ने कहा, “हमारे उत्पादों के लिए कई सारी प्रौद्योगिकीयों और प्लेटफार्म्स पर काम करने के अलावा हम नए हलचल मचानेवाले उत्पाद और सेवाएं लांच कर रहे हैं, जो वाणिज्यिक वाहन के प्रतिमान बदल देंगे। हमारा जोर सुरक्षा, विश्वसनीयता और स्वामित्व की लागत घटाने पर है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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