एक बाल कलाकार के तौर पर अनीस बज्मी ने किया था ‘नसीब’ में काम

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निर्देशक अनीस बज्मी ने एक पुरानी तस्वीर को साझा कर इस बात का खुलासा किया है कि उन्होंने साल 1981 में आई फिल्म ‘नसीब’ में एक बाल कलाकार के तौर पर काम किया है। ‘प्यार तो होना ही था’, ‘वेलकम’, ‘सिंह इज किंग’, ‘रेडी’ और ‘मुबारकां’ जैसी फिल्मों का निर्देशन करने वाले अनीस ने गुरुवार को ट्विटर पर ‘नसीब’ के सेट की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर साझा की जिसमें अभिनेता अमजद खान भी नजर आ रहे हैं।

तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “सालों से एक लेखक और एक निर्देशक दोनों के तौर पर इंडस्ट्री के सर्वश्रेष्ठ के साथ काम करने में मैं काफी सौभाग्यशाली रहा हूं। लेकिन क्या आपको पता है कि मैं एक बाल कलाकार भी था? फिल्म ‘नसीब’ से अमजद खान साहब के साथ ली गई एक बेहतरीन तस्वीर।”

अनीस फिलहाल ‘पागलपंती’ की शूटिंग में व्यस्त हैं जिसमें अनिल कपूर, जॉन अब्राहम, इलियाना डिक्रूज, अरशद वारसी और कृति खरबंदा जैसे कलाकार हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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