लॉर्ड्स में ग्राउंड स्टाफ की मदद करते दिखे अर्जुन तेंदुलकर

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दिग्गज भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर इन दिनों लंदन के लॉर्ड्स मैदान में ग्राउंड स्टाफ की मदद करते नजर आ रहे हैं। लॉर्डस क्रिकेट ग्राउंड ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक ट्विटर पर एक तस्वीर पोस्ट की है जिसमें लिखा गया, “अर्जुन तेंदुलकर न सिर्फ एमसीसी यंग क्रिकेटर्स के साथ हाल ही में ट्रेनिंग कर रहे थे, बल्कि वह हमारे ग्राउंड स्टाफ की मदद भी कर रहे हैं।”

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्जुन ने हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ अंडर-19 क्रिकेट में पदार्पण किया था, जहां उन्होंने अपना पहला विकेट लिया था।

अर्जुन मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के साथ लॉर्डस मैदान में अभ्यास भी करते हैं। उन्होंने ने दूसरे टेस्ट से पहले भारतीय बल्लेबाजों को अभ्यास कराने में हिस्सा लिया था।

भारत और इंग्लैंड की टीमें इस समय लॉर्डस मैदान पर पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच खेल रही हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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