नई फिल्म की शुरुआत मिशन लगती है : अभिनेता अर्जुन कपूर

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अपनी 12वीं फिल्म ‘इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड’ की शूटिंग शुरू कर चुके अभिनेता अर्जुन कपूर ने कहा कि नई फिल्म की शुरुआत मिशन जैसी लगती है। अर्जुन ने शनिवार को फिल्म के क्लैपबोर्ड की एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा, “एक नई फिल्म की शुरुआत हमेशा एक मिशन की तरह महसूस कराती है और इस बार यह ‘इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड’ है। अपनी 12वीं फिल्म शुरू करने से खुश और उत्साहित हूं! 24 मई, 2019।”

फिल्म के निर्देशन राजकुमार गुप्ता ने भी वही तस्वीर साझा करते हुए लिखा, एक मिशन साझा करते हुए उत्साहित हैं। इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड की शुटिंग शुरू। ‘इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड’ के लिए 24 मई, 2019 के लिए चिह्न्ति करें।

गुप्ता इससे पहले ‘नो वन किल्ड जेसिका’ और ‘रेड’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। ‘इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड’ खुफिया अधिकारी की भूमिका में हैं। नेपाल और दिल्ली में इसकी शूटिंग शुरू होगी। यह फिल्म एक गुप्त मिशन के दौरान एक आतंकवादी को खोजने और गिरफ्तार करने पर आधारित होगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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