घाटे में चल रही बीको लॉरी को बंद करने को मंजूरी

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आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को बीको लॉरी लिमिटेड (बीएलएल) को बंद करने की मंजूरी प्रदान की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कोलकाता मुख्यालय वाली इस कंपनी को घाटे से उबारने के लिए कई प्रसास किए गए, मगर कामयाबी नहीं मिलने पर सरकार ने इसे बंद करने का फैसला किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सीसीईए ने कंपनी के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस)/स्वैच्छिक वियोजन योजना (वीएसएस) को भी मंजूरी प्रदान की।

ब्रिटिश इंडिया इलेक्ट्रिक कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के रूप में यह कंपनी 1919 में अस्तित्व में आई थी। कंपनी के कारोबार में स्विचगियर विनिर्माण, इलेक्ट्रिकल रिपेयर, प्रोजेक्ट्स डिवीजन और तेल मिश्रण व भराई केंद्र शामिल थे।

बयान के अनुसार, सरकार के विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुरूप समस्त देनदारियों के निष्पादन के बाद बीएलएल की निष्क्रिय परिसंपत्तियों का उत्पादक उपयोग किया जाएगा।

सरकार ने कहा कि कंपनी लगातार वित्तीय दबाव में थी और कामकाज संबंधी समस्याओं से भी जूझ रही थी। पिछले कई वर्षों से कंपनी को घाटा हो रहा था। बीएलएल का संचित घाटा उसकी इक्विटी से अधिक हो गया था और शुद्ध संपत्ति नकारात्मक हो गई थी।

वित्त वर्ष 2017-18 के अंत में 31 मार्च को कंपनी की शुद्ध संपत्ति 78.88 करोड़ रुपये रह गई, जबकि संचित घाटा 153.95 करोड़ रुपये था।

बयान में कहा गया है कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कंपनी को दोबारा चालू करने के लिए समय-समय पर विभिन्न कदम उठाए। बहरहाल, कंपनी को दोबारा चालू नहीं किया जा सका।

इसके अलावा भारी पूंजी आवश्यकता तथा प्रतिस्पर्धी व्यापारिक माहौल के मद्देनजर कंपनी को दोबारा चालू करने की कोई संभावना नजर नहीं आती। कंपनी को लगातार घाटा होता रहा, जिसके कारण उसे आगे चलाना नुकसानदेह हो गया था। इसके अतिरिक्त अनिश्चित भविष्य के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों में निराशा पैदा हो रही थी।

बीएलएल केंद्र सरकार द्वारा संचालित सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (सीपीएसई) है। इसमें तेल उद्योग विकास बोर्ड की इक्विटी 67.33 प्रतिशत और भारत सरकार की इक्विटी 32.33 प्रतिशत है। शेष 0.44 प्रतिशत हिस्सा अन्य के पास है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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