नरेंद्र मोदी के अलावा प्रधानमन्त्री पद का एक और दावेदार इस बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहा है

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जयपुर। देश के अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे इस बात को लेकर भारतीय जनता पार्टी हमेशा से निश्चिंत आश्वस्त रही है और वह हर पॉलीटिकल डिबेट में यह बात कहती आई है लेकिन हाल ही 11 और 12 जनवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान में भारतीय जनता पार्टी के आधारित अधिकारिक तौर पर हुए लोकसभा के चुनाव के लिए अपने मोर्चा बंदी को लेकर एलान में कई सवालों को खड़ा कर दिया है. 

दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई बीजेपी की इस बैठक में यह ऐलान कर हुआ कि हाल ही में विधानसभा चुनाव में जिन तीन राज्य में बीजेपी की सरकार थी और उन्हें हार का सामना करना पड़ा है वहां की भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों को केंद्रीय संगठन में खफा लिया जाए जिसमें वसुंधरा राजे शिवराज सिंह चौहान और रमण सिंह को केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भूमिका देने की बात कही जा रही है इसके अलावा बीजेपी आलाकमान की तरफ से उठाए गए कदम अब सियासी कयास बाजी को शुरू कर चुका है. बीजेपी के इस ऐलान के बाद यह बात चल शुरू हो गई है कि क्या अब भारतीय जनता पार्टी में नरेंद्र मोदी के अलावा भी कोई ऐसा नेता तैयार करने की कोशिश की जा रही है कि जो प्रधानमंत्री पद पर जा सकें.

हाल ही में पांच राज्य में दिसंबर 2018 में विधानसभा के चुनाव हुए थे जिस में पांचों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की हार हुई और 3 राज्यों में हो जहां उनकी सरकार थी वह भी उसके हाथ से चले गए और यह सब चुनावी साल से पिछले साल के अंत में हुआ और इसके बड़े राजनीतिक समीकरण निकाले जा रहे थे. आपको बता दें कि राजस्थान में जा हर 5 साल में सरकार बदलती है लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी टक्कर दी वहीं मध्य प्रदेश में बात करें तो 15 साल की एंटी इनकंबेंसी के बाद भी मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी और मुकाबला अंत तक बराबरी का रहा.

वहीं अगर हम छत्तीसगढ़ की बात करें तो वहां पर भारतीय जनता पार्टी की एकतरफा हार्वे 90 लोकसभा की सीटों में भारतीय जनता पार्टी को मात्र 15 सीटें मिली और ऐसे में अब वहां के 15 साल से मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ मोर्चा शुरू हो गया है यह मोर्चा तक भारतीय जनता पार्टी में शांत रहा लेकिन अब जब चुनाव हार चुके हैं तो यह मोर्चा काफी सक्रिय हो चुका है.

ऐसे में अब इन तीनों नेताओं को केंद्र की राजनीति में लाने की कोशिश की जा रही है आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से वसुंधरा राजे दिल्ली में थी इसके अलावा वही बात करें शिवराज सिंह चौहान की तो वह कह चुके हैं कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं वह मध्य प्रदेश में रहकर ही जनता की सेवा करेंगे.

अभी समय बताएगा कि क्या यह तीनों नेता केंद्र की राजनीति में सक्रिय होते हैं और होते हैं तो किन पदों पर होते हैं और उनके आने की राजनीति किस तरह की देखी जाती है.

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