अनुपम खेर संग ‘बा बा.’ के निर्देशक की मास्टरक्लास, जानिए इसके बारे में !

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आपको बता दें कि नवोदित निर्देशक विश्वास पाड्या ने कहा कि फिल्म ‘बा बा ब्लैक शिप’ में दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर का रूप परिवर्तन देखना एक मास्टरक्लास जैसा था। अनुपम ने कहा, “मेरे पास एक ही किरदार में दो भूमिकाएं निभाने का विकल्प था। एक तरफ, एक दब्बू पिता का, जिसके बेटे को बाद में पता चलता है कि वह एक कॉन्ट्रेक्ट किलर हैं।”

उन्होंने कहा, “मैंने सोचा था कि दोनों भूमिकाएं अलग दिखनी चाहिए और मुझे इस फिल्म के लिए वजन कम करने की संभावना देखी। मैंने इससे पहले कभी वजन कम नहीं किया है और इसके लिए मैंने 15 किलो वजन कम किया। मैंने काफी वर्कआउट किया।”

विश्वास पांड्या ने कहा, “अनुपम जी को इतनी आसानी से अपनी आवाज और शारीरिक हावभाव बदलते देखना..मेरे लिए यह किसी मास्टरक्लास से कम नहीं था, विशेषकर मेरे जैसे नए निर्देशक के लिए।”

निर्देशक ने कहा, “उनकी अपनी कला पर गजब की पकड़ है।” इसके ​साथ ही बताया गया है कि यह फिल्म 23 मार्च को रिलीज होगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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