35 साल के शानदार फिल्मी सफर के बाद बोले अनुपम खेर- अभी तो सिर्फ इंटरवेल ही हुआ है आगे देखो…

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बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार अनुपम खेर अपनी फिल्मों को लेकर आए दिन चर्चा में रहते है अनुपम हर साल अपनी कोई ना कोई हिट फिल्म देते है।फिल्म इंडस्ट्री में 35 साल जीने के बाद हाल ही में अनुपम ने अपने इस करियर के बारे में बात की।इस दौरान एक्टर का कहना है कि 35 साल का शानदार सफर तय करना किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। लेकिन 25 मई 1984 को फिल्म सारांश से सिल्वरस्क्रीन पर दस्तक देने वाले अनुपम खेर के लिए यह महज एक ‘इंटरवल’ है।

इस दौरान अपनी जिंदगी के ‘सारांश’ को आत्मकथा ‘लेसन्स लाइफ टॉट मी अननोइंगली’ (सबक, जो जिंदगी ने मुझे अनजाने में सिखाए) में पिरोने जा रहे  अनुपम ने अपनी प्रोफेशनल लाइफ के बारे में बात की। अपने फ्यूचर प्लांस  के बारे में अनुपम ने कहा कि वह बॉलिवुड से ब्रेक लेकर हॉलिवुड में ही सक्रिय रहने वाले हैं। बकौल अनुपम, ‘यहां पर यह शुरू हो गया था कि अनुपम खेर तो वेटरन हैं, लेजंड हैं, दूसरे शब्दों में इनको लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दे दो और इनका पैकअप कर दो। लेकिन मुझे लगता है कि मैंने तो अभी शुरुआत की है। इसीलिए, मैंने सोचा कि बेस्ट है कि मैं उस भाषा में काम करता हूं, जहां पर मुझे न्यूकमर की फीलिंग आए, तो मैं अमेरिका में अंग्रेजी सीरीज कर रहा हूं। इसके अलावा, मेरी आत्मकथा ‘लेसन्स लाइफ टॉट मी अननोइंगली’ 5 अगस्त को रिलीज होगी।

असफलता को लेकर अनुपम कहते है 90 के दशक में एक वक्त ऐसा भी था, जब अनुपम खेर को कॉमिडी करने वाले पापा के रोल में टाइपकास्ट कर दिया गया था, क्या उस वक्त करियर को लेकर कोई चिंता हुई थी? इस पर वह कहते हैं, ‘बिल्कुल नहीं, क्योंकि मैं असफलता से नहीं डरता हूं। जब मैं छोटा था, तो मेरे फादर ने कहा था कि इंसान फेल नहीं होता, इवेंट फेल होता है। जब आप असफलता से नहीं डरते और जबरदस्त पॉजिटिव सोच रखते हैं, तो सिवाय जीतने के कोई ऑप्शन नहीं है। मैं पहला ऐक्टर था, जिसने सारांश में 27 साल की उम्र में 65 साल के बूढ़े का रोल किया था, लेकिन मैंने उसे पॉजिटिवली लिया। फिर, जब मुझे काम मिलना शुरू हो गया, तो काफी लोगों ने कहा कि तू तो फंस गया, अब तू केवल बूड्डों के रोल करेगा, ट्रैजिडी वाले रोल करेगा, लेकिन ये इमेज-विमेज सिर्फ कहने की बातें हैं। दरअसल, हम दूसरों की बातों पर बहुत डिपेंड करते हैं और पूरी कोशिश रहेगी कि आप दुखी रहो।’

अनुपम ने इंडस्ट्री में अपना मुकाबला वरुण से कहा उन्होनें कहा कि एक कलाकार के लिए इतने लंबे समय तक खुद की मौजूदगी दर्ज करा पाना भी आसान नहीं होता। अनुपम ने उसके लिए क्या किया? जवाब में उनका कहना है, ‘मैंने ऐसा कुछ सोचा नहीं। मुझे बनवाटीपन से कोफ्त होती है। मेरा मानना है कि जो आदमी दिखावा करता है, वह खुद को पसंद नहीं करता। इसलिए वह कोई और बनना चाहता है, मैं खुद को पसंद करता हूं। मेरा कॉम्पिटिशन अपनी उम्र के लोगों के साथ थोड़ी ही है, मेरा कॉम्पिटिशन तो वरुण धवन के साथ है। यह हेल्दी कॉम्पिटिशन है, जो तुम कर सकते हैं, वह मैं भी कर सकता हूं। जैसे, अभी मैंने बॉक्सिंग सीखना शुरू किया है। मोबाइल के नए फीचर्स खुद सीखता रहता हूं।’

अनुपम ने कहा कि ‘मेरे लिए यह 35 साल कोई मील का पत्थर नहीं है, बल्कि इंटरवल है। मैं आज अगर इस बारे में बात कर रहा हूं, तो इसलिए कि शायद मेरी लाइफ उन लोगों के लिए प्रेरणा हो, जो सोचते हैं कि उनके पास साधन नहीं है, इंडस्ट्री में उनका कोई जानने वाला नहीं है, तो क्या वे कामयाब होंगे? उनको यह बताना जरूरी है कि भई, यह संभव है। मेरी जिंदगी एक छोटे शहर में शुरू हुई। मेरे पिता जी 90 रुपये कमाते थे। फॉरेस्ट में क्लर्क थे। फिर भी, मैं यहां बैठा हूं, जो इस बात का सबूत है कि अगर आप मेहनत करो और सचाई के रास्ते पर चलो, तो आप कुछ बन सकते हैं। इन 35 सालों का निचोड़ यह है। आपको सिर्फ माद्दा चाहिए, सच और मेहनत का माद्दा। मेरे ऑफिस में मेरे पहले आईडी कार्ड की तस्वीर लगी हुई है, वहीं, पद्मभूषण का तमगा भी है, पिता जी की तस्वीर और उनके भेजे हुए 200 रुपये के बाउंस चेक भी हैं, जो वह भेजते थे और बाउंस हो जाते थे। मैं वह सब देखता रहता हूं, ताकि मेरा बैलेंस सही रहे, दिमाग का भी और जीवन का भी। मैं आगे की जिंदगी ऐसे ही जीना चाहता हूं।’

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