गौरी लंकेश की हत्या के मामले में एक और संदिग्ध गिरफ्तार

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पुलिस ने कन्नड़ पत्रिका की संपादक गौरी लंकेश की पिछले साल सितंबर में हुई हत्या के संबंध में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। विशेष जांच दल (एसआईटी) के अधिकारी एम.एन. अनुचेत ने एक बयान में कहा, “गौरी लंकेश मामले में एसआईटी ने सिंदगी (कर्नाटक के विजयपुरा जिला में) निवासी परशुराम वागमारे (26) को गिरफ्तार किया है।”

अभियुक्त को मंगलवार को यहां न्यायालय में पेश करने के बाद 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

बयान में कहा गया है, “गौरी लंकेश की हत्या की साजिश में उसकी (वागमारे) भूमिका तथा अन्य जानकारी बाद में बताई जाएगी अन्यथा जांच प्रभावित हो सकती है।”

इस बहुचर्चित हत्याकांड में एसआईटी अब तक कम से कम चार और लोगों को हिरासत में ले चुकी है।

पुलिस द्वारा दो मार्च को के. टी. नवीन कुमार (37) के पास से लगभग 15 अवैध कारतूस बरामद करने के बाद उसे हिरासत में लिया गया था।

पिछले साल पांच सितंबर को ‘लंकेश पत्रिका’ की संपादक गौरी लंकेश (55) की शहर के उपनगरीय इलाके में स्थित उनके आवास पर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

पुलिस के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने कुल सात गोलियां मारी जिनमें तीन (दो छाती और एक माथे पर) गौरी को लगीं थीं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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