वोटबैंक की राजनीति के कारण एनआरसी पर रुख साफ नहीं कर रहे राहुल : अमित शाह

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को यहां कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के विरोध के बावजूद घुसपैठियों की पहचान के लिए पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने को प्रतिबद्ध है। शाह ने यहां एक रैली में कहा, “ममतादी, केवल आपके विरोध के कारण एनआरसी नहीं रुकेगा। आप विरोध करने के लिए आजाद हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी विरोध करने के लिए आजाद हैं। लेकिन हमारी यह प्रतिबद्धता है कि सभी घुसपैठियों की एक-एक कर पहचान करें और कानून के मुताबिक असम में एनआरसी को पूरा करें।”

उन्होंने कहा कि राहुल वोटबैंक की राजनीति के लिए एनआरसी पर अपना रुख स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। असम समझौते के मुताबिक, दस्तावेज पर कार्य हो रहा है। इस समझौते पर 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हस्ताक्षर किए थे।

भाजपा प्रमुख ने कहा, “असम समझौते के मुताबिक एनआरसी पर कार्य किया जा रहा है। असम समझौता किसने किया? इसे 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा किया गया था।”

शाह ने भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा आयोजित रैली में कहा, “अब वोटबैंक की राजनीति के लिए राहुल गांधी अपना रुख साफ नहीं कर रहे हैं।”

शाह ने राहुल और ममता को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें देश की सुरक्षा या वोटबैंक की राजनीति में से अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करनी चाहिए।

ममता बनर्जी द्वारा 2005 में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी पर पेपर फेंकने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने की मांग करते हुए सदन में गतिरोध उत्पन्न किए जाने का वाकया याद दिलाते हुए शाह ने कहा कि ममता ने अपना रुख बदल लिया है, क्योंकि वे घुसपैठिए अब उनके लिए वोट करेंगे।

शाह ने भीड़ से जब पूछा कि क्या बांग्लादेशी घुसपैठियों ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया या नहीं? वे बंगाल में बम विस्फोटों में शामिल थे या नहीं? और उन्हें बाहर निकाला जाना चाहिए या नहीं? भीड़ ने हां में जवाब दिया।

शाह ने कहा कि अगर घुसपैठ नहीं रोकी गई तो पश्चिम बंगाल एक स्वस्थ राज्य नहीं बन पाएगा। उन्होंने कहा कि बनर्जी के शासन में घुसपैठ तेजी से बढ़ी है।

उन्होंने कहा, “और घुसपैठ को रोकने का सबसे बेहतर तरीका है एनआरसी। इसलिए असम में एनआरसी प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए।”

शाह ने ममता पर बंगाल में यह ‘झूठी सूचना’ फैलाने का आरोप लगाया कि एनआरसी के कारण भारत से शरणार्थियों को खदेड़ दिया जाएगा और कहा कि यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि शरणार्थी भारत में रहें।

उन्होंने कहा, “मैं बंगाल के सभी शरणार्थियों को आश्वस्त करता हूं कि भाजपा सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक-2016 ला रही है। इस विधेयक में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए ईसाइयों, बौद्ध और हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है। किसी शरणार्थी को वापस भेजने की कोई योजना नहीं है।”

घुसपैठियों के मानवाधिकारों को लेकर चिंता व्यक्त करने वाले एनआरसी के आलोचकों पर हमला बोलते हुए शाह ने आश्चर्य जताया कि क्या कांग्रेस और तृणमूल को पश्चिम बंगाल के हिंदुओं व मुसलमानों के मानवाधिकार को लेकर चिंता नहीं है।

उन्होंने कहा, “क्या आप इस बात से परेशान नहीं हैं कि बांग्लादेशी घुसपैठिए उनकी आजीविका, आय, सुरक्षा, शिक्षा को उनसे छीन रहे हैं?”

तृणमूल द्वारा हवाईअड्डे से लेकर रैली स्थल पर पोस्टर चस्पा करने का जिक्र करते हुए शाह ने कहा, “भाजपा कैसे बंगाल विरोधी हो सकती है? हमारी पार्टी की स्थापना बंगाल के एक बेटे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ही की थी।”

पोस्टरों पर लिखा हुआ था, “बंगाल विरोधी भाजपा और अमित शाह वापस जाओ।” शाह ने कहा, “ममतादी, बंगाल के लिए हमारा गहरा प्यार और सम्मान वोटों के लिए नहीं है.. हम बंगाल विरोधी नहीं हैं, लेकिन निश्चित रूप से ममता विरोधी हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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