महामारी के बीच Randeep Hooda का यात्रा के लिए कम नहीं हुआ प्यार

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बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने शुक्रवार को कहा कि महामारी के बाद सामान्य दिनों में यात्रा (ट्रैवल) के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ है, बल्कि पहले जैसा ही बना हुआ है। अभिनेता ने अपने सत्यापित ट्विटर अकाउंट पर हवाई अड्डे से कुछ तस्वीरों को साझा किया। वह एक मास्क और फेस शील्ड पहने हुए नजर आए।

रणदीप ने तस्वीरों को साझा करते हुए कैप्शन में लिखा, “नया सामान्य (न्यू नॉर्मल) मैं पुरानी ही (ओल्ड मी) यात्रा के लिए प्यार अबाध रूप से बना हुआ है।”

अभिनेता ने हाल ही में कोविड-19 महामारी के कारण होने वाले प्लास्टिक प्रदूषण और इसके धरती पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जागरूक रहने की अपील की थी।

काम के मोर्चे पर बात करें तो अभिनेता ने सलमान खान अभिनीत एक्शन ड्रामा ‘राधे : योर मोस्ट वांटेड भाई’ की शूटिंग पूरी कर ली है।

इसके अलावा वह ‘अनफेयर एंड लवली’ में भी दिखाई देंगे। इस कॉमेडी फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री इलियाना डीक्रूज भी दिखाई देंगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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