महामारी के बीच भारतीय पैरेंट्स अपने फंसे बच्चों को अमेरिका के रास्ते यूएई ला रहे

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कोविड-19 महामारी के बीच भारत की तरफ से इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि विजिट वीजा होल्डर्स को यूएई यात्रा की कब अनुमति दी जाएगी, ऐसे में परेशान भारतीय माता-पिता अपने बच्चों को भारत से अमेरिका भेज रहे हैं, ताकि वे वहां से यूएई की यात्रा कर सकें। यूएई स्थित भारतीय राजदूत पवन कपूर ने सोमवार को खलीज टाइम्स से कहा कि भारत सरकार ने अभी इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है कि वह अपने नागरिकों को विजिट वीजा पर यात्रा की अनुमति देगी या नहीं।

खलीज टाइम्स की रपट के अनुसार, माता-पिता के पास कोई विकल्प नहीं है और वे अपने बच्चों को अपने पास बुलाने के लिए अब कठोर उपाय अपना रहे हैं।

दुबई के एक निवासी साहाद सत्तार ने कहा कि उनके दो किशोर बेटे दक्षिण भारतीय राज्य केरल में मार्च से फंसे पड़े थे। उन्होंने दुबई के लिए उड़ान पकड़ने से पहले कालिकट से दिल्ली और फिर शिकागो की 46 घंटे लंबी यात्रा की।

इस उपाय से प्रेरित और भी पैरेंट्स इस रास्ते को अपना रहे हैं।

ऑनलाइन पहल ‘टेकमेटोमम’ में एक प्रशासक, नीता सलाम ने कहा कि कई सारे माता-पिता यूएई के लिए इस रास्ते के बारे में पूछ रहे हैं। टेकमेटोमम समूह की स्थापना 200 से अधिक उन भारतीय माताओं ने किया है, जिनके बच्चे भारत में फंसे पड़े हैं।

सलाम ने कहा, “कम से कम छह पैरेंट्स ने मुझसे इस विकल्प के बारे में संपर्क किया है। यह एक हताशा भरा कदम है। लेकिन पैरेंट्स को लगता है कि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।”

दुबई स्थित एक पैरेंट, जिसका बेटा नई दिल्ली में फंसा पड़ा है, ने खलीज टाइम्स से कहा, “मैंने अपने बेटे के लिए मंगलवार को वाशिंगटन के लिए टिकट बुक किया। विचित्र बात यह है कि जब अमेरिका और भारत में लॉकडाउन घोषित हुआ था, मैंने उसे अमेरिका से भारत भेज दिया यह सोचकर कि वहां से उसे यूएई लाने में आसानी होगी। वह एक अमेरिकी विश्वविद्यालय का छात्र है। अब उसे वापस अमेरिका लौटना पड़ रहा है।”

चूंकि अमेरिका में अलग-अलग राज्य के अलग-अलग कानून हैं, लिहाजा बच्चों को 14 दिनों के क्वोरंटीन के लिए नहीं कहा जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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