अमेरिका : प्रवासी बच्चों को माता-पिता से मिलाने से पहले डीएनए टेस्ट का पेंच

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अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर अवैध प्रवासी मां-बाप से अलग किए गए बच्चों को उनसे मिलाने से पहले डीएनए टेस्ट किया जा रहा है। अधिकारी ने बुधवार देर शाम सीएनएन को बताया, “बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इन बच्चों के माता-पिता होने का दावा कर तस्करी करना आसान है। इसलिए पूर्ण जांच और बच्चों के माता-पिता होने की पुष्टि के बाद ही बच्चों को सौंपा जाएगा।”

अधिकारी ने हालांकि जानकारी देने से इनकार कर दिया कि क्या डीएनए जांच के लिए सहमति जरूरी है या स्टोरेज डेटाबेस के जरिए डीएनए की जांच की जाएगी।

टेक्सास में गैरलाभकारी संस्था ‘आरएआईसीईएस’ की संचार निदेशक जेनिफर के.फाल्कन ने शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए निशुल्क और कम दर पर कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने की पेशकश की है। उन्होंने इस पूरे कदम को निंदनीय बताया है क्योंकि इस तरह के संवेदनशील डेटा को संग्रहित करने से सरकार इन बच्चों पर जीवनभर नजर रख सकती है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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