जम्मू से अमरनाथ यात्रा अस्थाई तौर पर रोकी गई, जानिए क्यों ?

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भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोहों से पहले प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर सोमवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा को तीन दिनों के लिए रोकने का फैसला किया। पुलिस ने कहा कि सोमवार को किसी भी तीर्थयात्री को जम्मू के भगवती नगर यात्रा निवास से कश्मीर की ओर जाने की अनुमति नहीं है।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि हालांकि बालटाल और पहलगाम दोनों आधार शिविरों पर मौजूद तीर्थयात्री तीनों दिन पवित्र गुफा की ओर बढ़ेंगे। 14 अगस्त और 15 अगस्त को पाकिस्तान और भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले घाटी में तनाव व्याप्त है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचने के लिए आतंकवादी हमेशा से इन दिनों के आसापस घाटी में हमले करने की कोशिश करते हैं। किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। 28 जून से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में अब तक लगभग 2.79 लाख तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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