नवाज के साथ हमेशा से ही काम करने की चाहत थी : सुधीर मिश्रा

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राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता सुधीर मिश्रा का कहना है कि वह हमेशा से ही नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ काम करना चाहते थे और नवाज को एक अच्छे किरदार का ऑफर देने का उन्हें इंतजार था।

सुधीर मिश्रा की यह फिल्म उपन्यास ‘सीरियस मैन’ का रूपांतरण है जिसमें नवाज एक मुख्य भूमिका में हैं।

इस बारे में बात करते हुए सुधीर ने आईएएनएस को बताया, “वह एक बहुत ही उम्दा कलाकार हैं और मैं हमेशा से ही उनके साथ काम करना चाहता था, लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ अच्छा ऑफर करना था क्योंकि अच्छे कलाकारों को हमेशा अच्छे स्क्रिप्ट की चाह रहती है। मनू जोसेफ की उपन्यास ‘सीरियस मैन’ में मुझे उनके लिए एक अच्छा किरदार मिला।”

साल 2010 में आए इस उपन्यास की कहानी जाति-वर्ग और लिंग संघर्ष की है।

फिल्म के बारे में बात करते हुए सुधीर ने कहा, “यह दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक पिता और पुत्र की कहानी है। इसमें पिता काफी सख्त रहता है और जिंदगी के अधिकतर फैसलों को वह गुस्से में आकर लेता है।”

सुधीर ने कहा, “इस किरदार के माध्यम से एक गुस्सैल व्यक्ति के अंदर की नरम छवि को दिखाया जाएगा।”

सुधीर मिश्रा, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘चमेली’ और ‘इनकार’ जैसी फिल्मों के लिए मशहूर हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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