आल्सिस स्पोर्ट्स ने आईआईएस के साथ साझेदारी की घोषणा की

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भारतीय परफॉरमेंस परिधान ब्रांड आल्सिस स्पोर्ट्स ने गुरुवार को इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (आईआईएस) के साथ साझेदारी की घोषणा की। इसके तहत आल्सिस कंपनी संस्थान के खिलाड़ियों को तकनीकी रूप से उन्नत स्पोर्ट्सवियर प्रदान करेगी। एक बयान के अनुसार, आईआईएस भारत का पहला निजी क्षेत्र का हाई-परफॉरमेंस ट्रेनिंग सेंटर है। इसका उद्घाटन हाल में कर्नाटक के विजयनगर में किया गया।

इस समझौते के तहत आईआईएस के खिलाड़ियों को तकनीकी रूप से बेहतरीन स्पोर्ट्सवियर दिए जाएंगे।

आल्सिस स्पोर्ट्स के प्रबंध निदेशक रोशन बैद ने कहा, “पूर्ण रूप से एक भारतीय ब्रांड होने के कारण हमें आईआईएस के जुड़कर बहुत खुशी महसूस हो रही है। इसके जरिए भारत में खेल प्रतिभाओं को एक नए स्तर पर ले जाया जाएगा।”

खिलाड़ियों की ट्रेनिंग की जरूरतों और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर आल्सिस के उत्पादों में ड्राइ-टेक, सोआइल रिलीज, एंटी-ओडोर, एंटी-स्टेटिक और एंटी-यूवी जैसे नवीनतम तकनीक का उपयोग किया गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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