भूटान के झरनो से बनेगी बीयर,अल्फा और कटी पतंग ने की शुरूआत

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जयपुर।भारत की कई बीयर कंपनियां अपने प्रॉडक्ट के प्रमुख तत्व यानी पानी के लिये भूटान में उत्पादन के विकल्प तलाश रही है। कम्पनियो को वहा के प्राकृतिक झरनो के पानी से अपने ब्रांड को दूसरो से अलग करने में मदद मिलती है।इससे उनके प्रॉडक्ट को अच्छी कीमत भी मिलती है।

अल्फा और कटी पतंग जैसी बीयर ब्रांड कंपनियो ने इसकी शुरूआत ‘मेड इन भूटान’नाम से कर दी है। सिंबा,Arbor ब्रुइंग कंपनी और वाइट राइनो वहां पर पैर जमाने की कोशिश कर रही है।


मार्केटर्स का कहना है कि क्रॉफ्ट बीयर के कॉन्टैक्ट ब्रुइंग और बॉटलिंग इडिंयन मार्केट के बजाय भूटान में लाईसेंस लेना ज्यादा पसंद कर रहे है।अल्फा ब्रांड की मालिक पंजाब की मैडमिक्स ब्रुइंग कंपनी के अभिषेक दाहिया का कहना है कि,’भारत में बीयर फैक्ट्री लगाने में काफी परेशानी होती है।इसका लाइसेंस काफी महंगा होता है। वही भूटान में सारी प्रक्रियां चंद घंटो में ही हो जाती है।अगर यूरोप व ब्रिटेन से तुलना करे तो वहां से शिपमेंट्स में दो महीने लग जाते है।और भूटान में कारोबार शुरू करने में समय की भी बचत होती है।


देश की क्राफ्ट बीयर इण्डस्ट्री पहले भी खासतौर पर हेफेजाइन और विटबियर जैसी गेंहू बीयर कैटिगरी के जर्मनी और बेल्जियम जैसे देशों का रूख कर चुके है।भारत का क्राफ्ट बीयर का मार्केट ओवरआल डोमेस्टिक बीयर इंडस्ट्रिी का 2—3प्रतिशत है।


भूटान के किंजोर ब्रुअरी के साथ बेहतर तालमेल से दाहिया का हौसला काफी बढ़ गया है।उन्हे भरोसा है कि वे जून तक पोर्टफोलियो में एक और वेरिएंट जोडने के साथ अगस्त तक हरियाणा,उतराखंड,हिमाचल प्रदेश और उतर पूर्व में डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार कर लेगें।भूटान बीयर का टेस्ट भी बेहतर होता है।चूंकि,इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है,इसलिये मैन्यूफैक्चरर्स अपने प्रॉडक्ट को दूसरी कंपनियों से बेहतर बनाने के लिये भूटान में उत्पादन शूरू कर रहे है।

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