आलोक वर्मा फिर से सीबीआई प्रमुख बहाल हों : कांग्रेस

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कांग्रेस ने शनिवार को आलोक वर्मा को दोबारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) निदेशक के रूप में बहाल करने की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में चयन समिति द्वारा आलोक वर्मा को सीबीआई से हटाया जाना सही मायने में इंसाफ (नेचुरल जस्टिस) से इनकार करना है। पार्टी ने कहा कि यह फैसला राफेल जांच को बाधित करने के लिए लिया गया है।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सर्वोच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक को एक अखबार को दिए गए बयान का जिक्र करते हुए सत्ताधारी पार्टी पर आलोक वर्मा को सीबीआई से हटाने में जल्दबाजी करने का आरोप लगाया। पटनायक ने चयन समिति की बैठक का पर्यवेक्षण किया।

सिंघवी ने एक प्रेसवार्ता में कहा, “यह काफी गंभीर आवश्यक और महत्वपूर्ण है क्योंकि आखिरकार मसले वही हैं और इनमें परिवर्तन नहीं हुआ है। लेकिन मसला यह है कि जनहित के महत्वपूर्ण विषय को छिपाने के लिए जल्दबाजी, बेताबी और जरूरत दिखाई गई। यह सरकार डरी हुई है और मेरा मानना है कि यह बहुत साफ है कि बहुत कुछ छिपाने की कोशिश की जारी है।”

इससे पहले पटनायक ने एक अखबार को बताया कि वर्मा के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार का सबूत नहीं था और समिति ने फैसला काफी जल्दबाजी में लिया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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