ब्रह्माण्ड के विस्तार के लिए सारे सिद्धांत धरे रह गये है

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जयपुर। वैज्ञानिक ब्रह्मांड के कई राज़ खोलने के लिए एक के बाद एक नया सिद्धांत प्रस्तुत कर रहे है। जैसे विम्प के बारे सशंकित है, कुछ वैज्ञानिक मानते है किमाचो कभी भी ब्रह्माण्ड के 90% भाग के बराबर नही हो सकते है। कुछ वैज्ञानिक के अनुसार श्याम पदार्थ के जैसी विसंगतियां महाविस्फोट के सिद्धांत को खारीज करती है। इन सब का अंत का मतलब यही है कि  अनुपस्थित द्रव्यमान समस्या मानव जाति के ब्रह्माण्ड मे विशिष्ट स्थान को चुनौती दे रही है।

यदि माना जाये कि नान-बार्योनिक पदार्थ का अस्तित्व है तो इस हिसबा से हमारा विश्व और मनुष्य जाति ब्रह्माण्ड के केन्द्र से और भी दूर हो जायेगी। डा. सडौलेट के मुताबिक यह एक परम कोपरनिकस क्रांति है। इसके अनुसार है कि हम न ज्ञात  ब्रह्माण्ड के केन्द्र मे है और ना ही हम ब्रम्हाण्ड के  अधिकतर पदार्थ से निर्मित है। हम केवल इस ब्रह्मांड में थोड़े अतिरिक्त नगण्य तथ्य है तथा ब्रह्माण्ड हमसे पूरी तरह भिन्न है और इसको सच में तब्दिल श्याम पदार्थ की खोज करती है

जो कि ब्रह्माण्ड मे हमारी स्थिति के दृष्टिकोण को बदल देती है। यदि वैज्ञानिक नॉन-बार्योनिक श्याम पदार्थ के अस्तित्व को प्रमाणित कर देते है तो इसका अर्थ होगा कि हमारा विश्व और उस पर जीवन ब्रह्माण्ड के नगण्य तथा तुच्छ हिस्से से निर्मित है। आपको बता दे कि यह खोज हमारे दैनिक कार्यकलाप को प्रभावित नही करेगी लेकिन यह सोचना कि सारा ब्रह्माण्ड किसी अदृश्य अज्ञात वस्तू से बना है और यह कितना अजीब होगा ?

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