मिर्जापुर’ की तैयारियों के लिए अली फजल ने बंदूकों की दुकानों में बिताया समय

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अभिनेता अली फजल ने ‘मिर्जापुर’ में अपने किरदार गुड्डू पंडित को जीवंत करने के लिए बनारस में बंदूक की दुकानों में समय बिताया। इससे पहले सभ्य और आम लड़के के किरदार निभाने वाले अली ‘एमेजन प्राइम वीडियो ऑरीजिनल’ और ‘एक्सेल एंटरटेनमेंट’ की रोमांचक एक्शन श्रंखला ‘मिर्जापुर’ में एक अलग अवतार में नजर आएंगे।

बिना सोचे समझे गोली मारने वाले गुड्डू पंडित का रंग ढंग अपनाने के लिए अली बनारस के स्थानीय इलाकों में घूमे।

अली ने कहा, “किरादर निभाने में मुझे सबसे ज्यादा मदद बनारस में बंदूक की दुकानों पर मिली। बनारस में बंदूक की कई दुकानें हैं। बनारस में जैसे जनरल स्टोर से ज्यादा दुकानें बंदूक की हैं।”

फिल्म में विक्रांत मैसी, दिव्येंदु शर्मा, कुलभूषण खरबंदा, श्वेता त्रिपाठी, श्रिया पिलगाओंकर, रसिका दुग्गल, हर्षिता गौर और अमित सियाल भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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